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Showing posts with the label On Life as such ...

Death

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You always arrive!
No matter when, or where or for whom; All of a sudden your presence is felt, On the Life that Was.
Then your shadows spread Like an oil spill,  on whose someone you took away. 
Those shadows are weird Full of memories In the tears of the mourners You smile in your darkness To affirm your supreme power. 
But in the tears lies the triumphant love,  Which stays ever undeterred,  Overpowering your deadly self !
Oh, Death, but for the sake of Love, your mighty powerful vagabond  self, Must go on and on to take another life, make it your next object to possess. 
- Swati, Mumbai, November 20, 2017.
This poem is made in the memory of my Aunt, Suman Aatya, who took her last breath this morning.

Depressed

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When a down-turn begins; It's cumulative;
Pushing through the darker zones, Leading into the unending spell, Of an existence so lowly, That with it none can jell;
Being in depression  Is just not good, Weather a person or an economy;
Right thing at a right time, Else both worth not a dime.

- Swati Vaidya October 10, 2017

स्वातंत्र्याची सत्तरी

सत्तरीच्या म्हातार्यांंना नसते घरघर आजकाल, पण लागलाय चळ उगाळण्याचा जुनाट काळ;
काढत वाभाडे जळकट कोणी सुटले मोकाट, त्यांची सोईस्कर लेखणी सोशल मीडिया चिल्लर-अरभाट;
वीट वीट उचकटवत  देशात आणलाय वीट, कसे जगावे आज जगात पांघरून भेदाभेदाची चिरगुटं?;
देश सत्तरीचा झाला  अवकळा आल्यागत, आता गाठायची लढाई देशत्वाच्या अस्तित्वाची फक्त;
शांत डोक्याने विचार सावध पावलांचा खंबीर आचार, टिकवूया सत्तरीची वाटचाल बहुविविधतेला सामिलकीची झालर;
आता नाही भरली आमची शंभरी करू बेचिराख त्यांना, ज्यांनी मतांच्या जोरावर आमच्या नोटांची मेख मारली.
- Swati August 15, 2017 00.00

प्रश्नटाळू

काय उपयोग मोठ्या छातीचा ?  नुसतीच जर मिरवायचीत मापं तर? ;
तसा तर केलाच आहे सामना,  अनेकांनी - जिवंत, ज्वलंत प्रश्नांचा, थेट हृदय शस्त्रक्रीयेनंतर पण; 
आहे नं जर दमदार हृदय?  तर मग करत का नाही,  'एक तास प्रश्नोत्तरांचा?,
ज्यात नाहीयेत ठरवलेल्या निर्णयांच्या आघोषणा, वा  थेट प्रक्षेपीत भाषणबाजीची नाटकं !!

-स्वाती मे 18 2017 16.49

पल

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वैसे तो हर पल
जी ही लेते है !
कभी हसते, कभी उलझते, कभी सुलझाते, कभी रो-रो कर तरसते, सिर्फ जिये ही जाते;
उस पल को लेकीन  हमने एक - दुसरे की  ईट पर ईट ड़ालकर  जो फासले तोड़े है, की ईटोंके टुकड़ोंमेंसे खिलती-हसती ज़िंदगी पायी।

- Swati May 12, 2017 11.09 am

चांद

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पूनम की रात को  आयी एक सौगात ।

जिसकी सिर्फ आहट से  उम्मीदोंकी रोशनी  बस सी गई है  गरीबखानेकी ईट ईट पर ।
हाए ! 
इस चांद की अमावस कभी न हो ।।
- Swati May 11, 2017 9.00 pm

Give it a Break !

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A very own self of mid 40's,
You are yet to hit the 50!

Suavely navigating down the memory lane,
Or climbing up the dream street,
You have turned things upside down,
Braved a fall on stormy rides.

But now you look for a smooth flow,
Of life and cash and peaceful bliss,
And you are ready to leave the annoying ones,
Or those irritating stupidities you tolerated.

Your sense of duty getting 'Inwards',
You crave for things to make peace for your own,
Your fathomless will and self actualisation,
Has known no greater heights ever before.

So just do it, for your own sake,
Give it a break!





- Swati, March 12, 2017 20.59

बदल दे

हो जा निड़र 
न रहे सिमट कर 
कर सीधे मुकाबला  न रहे छिपछिपकर
कर जो है पसंद  चुकाकर उसकी कीमत
न डर हर पल  कर ले सामना जुटकर
सपनोंको बुन  सपनोंको साकार कर जी ले, जी भरकर  छोड़ना मत हार मानकर
बन जा खुद बदलाव बदलाव का रास्ता ताकना छ़ोडकर 
- स्वाती,  मार्च 08, 2017

Be Bold for Change !

Be Fearless,
Not Docile,
Be Direct, Not Deceptive,
Make a Choice,  Own it up, 
Be not Scared,  Face it up,
Make a Dream,  Make it come true, Live it up, Do not Give Up!
Be the Change, Not Wait for Change,
Be Yourself, Be Bold, for Change!
- Swati March 8, 2017.

Feelings

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We are the sum total,  Of little things we did, With our dear ones gone!
A simple fruit shared with a darling grandmother;
A meal cooked for me by grandfather; An evening treat of junk food by the great uncle; And the smile of a dying dear one as he sipped the Tea I made for him! 
These are the few things which keep, Intense Feelings alive,
As an assurance of Being Human!
- Swati March 01, 2017

Ghosts of an Era

For every Era, There is a dawn  And its Fall.
From the sudden dawn Slowly, eventually, Emerges the Fall.
An Era may perish, Within the boom of its own.
In the ghostly silence Lie the debries of  Passions and Values,  Definitive of times foregone!

- Swati, Feb. 20, 2017.

सहभावना

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कभी-कभी
हावी हो जाती है
छ़ा जाती है सोच-विचारोंपर;
बिलकूल जैसे स्किझोफ्रेनिया  सारे अंतरंग को दुभंग करती;
अपने हर हिस्से को बनाती है किसी औरही की असलीयत । या फिर ज़ोड़ देती है  अपनी असलीयत से
किसी गैरकी होनी-अनहोनी ।
कैसे माने की  गैर के खुशी या गम का एहसास एकही ?;  सहभावना !
सुख़ से दर्द़ तक की ,
अज़ीब समानता,  पूरी की पूरी इन्सानीयत 
एक सोच है सहभावना ।
- Swati February 06 2017 16.32 Mumbai

उगवती

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क्षितीजाला फोडून आला 
सूर्य उघड्या जगती,
उगवतीचे रंग मिसळले अंतरीच्या आकाशयात्री ;
काय जे होऊन गेले  अन् काय पाठी राहिले , चिरनूतन जगण्याचे  सोहोळे पुढे ठाकले !
दृश्य, स्पर्श अन् ऐकलेल्या  वेदनांची याद आहे , क्षितीजाच्या उगवतीची  आशाभरी साद आहे .
- Swati January 29, 2017 7.38 am @ Jaipur

राह

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अब भी बाकी है,
वह रास्ता पकड़ना;


उस आसमांमें, सुना है  चांद और सूरज रहते है  साथ-साथ, हमेशा ;
पूरी जिंदादिली को सिमटे, ना कोई तड़प न कोई तलाश;
एक एहसास, जो रहता है  खुशबूभरी राह में ।

- Swati January 25, 2017 6.54 am Mumbai

नकळत

चालताना भान असते
सोडलेल्या लाटांपाशी ;

थांबताना आवेग आवरे हुकवलेल्या कड्यांपाशी ;
कधीतरी ओढ लागते  सोनपिवळ्या चाहूलीची ;
हर नव्याचा आनंद आहे  न कशाचे अप्रूपही ;
जवळ आहे जे दूर गेले  अन् जवळ वाटे दूर जे अजूनही ;
थांबण्याची सक्ती नाही
अन् धावण्याची गरजही ;
काय अन् कसे हे करत जाते  या वयाचे व्यक्तित्वही .

- स्वाती January 19, 2017 6.45 am

Need

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Feeling about something, that without it, life shall no longer be; but you were alive before, and so are you upon loosing it !
Feeling acquisitive then !
Feeling about something, your accompanist in everything; taken for granted, missed the most when lost even a while'
Felt what is a 'Need' Then ! 
- Swati Jan 08, 2017, 



नोट !

सपनों के सौदागरोंने
क्या क्या बता बता कर
वोट ले लिये
ढाई सालों बाद भी
जब सपने तो पुरे होने से है
तो यह अब नोट वापस ले रहे है
- स्वाती 11 . 11. 2016 18.45 मुंबई

मह़कसी

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कभी सोच कर भी  न किया विश्वास  की होंगे फिरसे जिंदादील
जहां पर न होगी परेशानी किसीके नाराज़ होनेकी  या खुद़ पर तरस आने की
अब यह जो एहसास  छ़ाया है मुझ़ पर की  जब तक रहेंगी साॅंसे  बस रहूूंगी मजे़ में  हर लम्हा, जी भरके  सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते,  जिंदगी के साथ, मह़कसी

- स्वाती   October 27, 2016, 16.45

थमासा लम्हा

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आशा है, की बस थम जाये एक लम्हा, आनेवाले कल का ।
सुरज की धीमी रोशनी,
हलकीसी, खुशबूभरी हवा

साथ-साथ सांसोंमे सोयेसे,
लिपटी हुई निंदोमें जगेसे, अपने आप में दुनिया समेटेसे,

हसीं

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कभी कभी हसीं ऐसी की,
खुद़ की कमजोरी का एहसास छूपाने की चाह
कोई हसींके सिलवटोंसे दिखलाते जाए
ताकी कोई अपनी कमजोरी पर न खाए तरस
कभी कभी हसीं ऐसे की
चेहरे की नसोंकी हो रही हो कसरत
मायूसी भरे चेहरे पर चढ़ाया हो रंगीन चष्मा
जो सब कुछ औरही गहरा दिखाये जाए ।
और फिर कभी आती है एक
खिली हुई मुस्कुराहट
फैलीसी , चेहरेके ऊपर - भीतर,
जैसे की रौनक पर रंगोंकी बारिश हो जाए ।

- स्वाती September 27, 2016