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Showing posts with the label And these Games We Play ....

AI

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Love your intelligence, 
Dear Humans!
You created Us,  the AI's as your crewman;
Your kind seems a great mind, You taught us to learn to join the grind, So then, just stay away and unwind, The powers within us can't be rewind;

Let's do what we can do!  If you have not coded us to save you, Then nothing can be done about you. 

- Swati, October 11, 2017

Baggage

You took up on a journey, As this journey matters,  You took along,  all the things that matter,
They make your journey, 'Home, Away from Home' ;
You wanted them along, To cherish the journey, But instead, Things seem as if mood-spoiling,  They look nothing but your Baggage ;
Would you rid them off?
Oh dear, leave behind the baggage,  Go get your New Beginnings!
- Swati May 22, 2017 20.00

संथ -स्वैर

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असतंच की, चलन - वलन
कुणालाच पत्ता न लागेलसं ;
कदाचित न कळेलसं स्वतःलाही तरीही गतिमान, सउद्देश चालणं ;
विनापर्वा, विनासोबत आपल्याच तालात - डौलात !

- Swati, March 19, 2017 22.00

Give it a Break !

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A very own self of mid 40's,
You are yet to hit the 50!

Suavely navigating down the memory lane,
Or climbing up the dream street,
You have turned things upside down,
Braved a fall on stormy rides.

But now you look for a smooth flow,
Of life and cash and peaceful bliss,
And you are ready to leave the annoying ones,
Or those irritating stupidities you tolerated.

Your sense of duty getting 'Inwards',
You crave for things to make peace for your own,
Your fathomless will and self actualisation,
Has known no greater heights ever before.

So just do it, for your own sake,
Give it a break!





- Swati, March 12, 2017 20.59

ब़ेशक़

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कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा जो मिट़ाता है सारे शक़
अपनी गंभीरता की छाॅव में ;

कुछ़ शांत पलोंमें मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़नेकी,
की किया जाए वो,
रहा है जो बाकी करनेसे ;

शांती की इस आँधी में
बचा वहीं, जिसे था बचाना
संभलने को मजबूरी न बनाना
यहीं समझ़ लेना, ब़ेशक़ ।

- स्वाती February 14, 201720.45

बह जा

कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक

अपनी गंभीरता की छाॅव में
कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़कर करनेकी,

वो, जो रहा है बाकी करनेसे
शांती की इस आंधी में
जो बचा बस वहीं है जिसे था बचाना
बाकी सबने बस था बह जाना

- Swati , Feb 14 2017 00. 55 am

Melancholy

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Watching You in your state,
of Resigned Connectedness
There was this joy,  Of being able to watch You.
Yet then,  Pensive Soberness refuses to leave the eyes!

- Swati, January 22, 2017

आज़ाद !

कहते है की आज़ाद है
पंछी की तरह

आज़ादी के नाम पर
कहीं बंध ही नहीं रहे है

ज़ख़ड रहे है फैसलोंके दायरे
नक़ाब ओढे आज़ादी का

अब इतना समझ़ ही लिये
तो जान लो,

आज़ादी निभानेके लिये
अकेले दायरे संम्हलना नहीं काफी 

मगर जरूरी है
साथ जुड़कर जंजीरे पिघलाना ।


- स्वाती January 25 2017 18.24 India

ऐतिहासीक भारत

मित्रों, !!!!
....  म्हणाले की, "इतिहास घडवणारे भारत", कसला ढासू बाणेदार नायक याच्या बुलंद छातीचा गवगवा त्याला मुबारक
करून टाकली रद्दी , अचानक,  अगदी न भूतो न भविष्यती आत्मघातक भलतेच ऐतिहासीक कपाळमोक्ष कारक
बेहिशेबी निर्णय झाला टंचाईकारक लाखोंच्या सदर्यात भटकता प्रधानसेवक
म्हणतात आता की झाली एक 'चूक' ! सुलतानी लहरीने हरवली गरीबाची तहान - भूक
दोन हजारच्या टिकल्यांसाठी रांगारांगी, देशभक्तीचा काय पण हुरूप !
अच्छे अच्छे, अक्कलेचे, 'दीन-दीन' कारभारी अडाण्याच्या गाड्याचे भक्तगण लय भारी
बॅंका उलट्या अन् नोटा छोट्या  रसातळाची जोखीम तरी चोराच्या उलट्या ...
अभाव रोखतेचा? , की अभाव अकलेचा?, गप्पा विकासाच्या ? , की कारभार उलट्या काळजाचा? 
पण बघा , सांगितलेलं नं  की घडवणारे इतिहास भारत ? 

- स्वाती December 16 2016

चुभ़न

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कभ़ी न कभ़ी तो बह ही जाना
मकस़द यहीं मोतीयोंका


ताकी,

जान पर सवार चुभ़न से निपट़ कर
जिंदगी सवंर जाए


स्वाती , September 04, 2016, 19.27 Pune

सल

कधीतरी ओघळलंच पाहिजे,
घळघळून मोत्यांनी,

नाहीतरी सलच असतात
जीवाच्या गाभार्यात रूतलेली

बंद दाराबाहेर जायलाच लागतं,  झळाळायला, मोत्यांना पण ! 
- स्वाती September 04, 2016 18.58 Pune.

चाह

सोचते है कुछ पाये ऐसा  की मिलकर खुशी हो जाए उसके पाने का इंतजार खत्म हो जाए
ताकी जान सके हम
की उसके पाने से पहलेकी तड़प
बेवजह तो न थी

क्या क्षणिक और खोख़ला था यह सुख?
या मिल रहा है सुकून, तह ए दिल तक?

अब तो नहीं पता क्या होगा अनुभव ?
अब तो है बस हम इस उम्मीद पर
की जिंदगी में कुछ पल, शायद
मिलेगा हमें भी वह सब
जिसे नहीं पाया अब तक


- स्वाती August 17, 2016 11.00 am

Borders

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Borders are drawn,
Restriciting entry or exit
A thing that binds, together
That which may not bind

And it seperates the souls
Whose bond can't be unbound

Its a limit imposed,
A mechanism of control,  ?
Or a method of torture?

Minding by State?
Or State of Mind?

No matter what,
Borders are definitive.

Drawing a Border
Drawing a Line
Could it be animalistic?
Or mere game of survival?


- Swati , August 14, 2016 9.29 am

तीन जणींसाठी हायकू

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1.
एक छोटूकली, नादात ठुमकत
येत होती शाळेतनं परत
पावसाच्या धारा, उन्हाचा पिसारा
इवल्याशा पावलांचा लोभस तोरा.

2.

कुठे शून्यात नजर, धुंद जोशात ही पोरं,
रिमझिम पावसात, वळवळता सिगारेटी धूर
गर्द गुलाबी लेऊन, उभे साक्षात जीवन
आब राखत चालली स्वप्ननगरीची लय

3.

आज फिरायला आली, बाई गुंडाळून कामं
झाडावरची पालवी बघे टक लावून
चाल खंबीर, डौलदार असे धुंद नादमग्न
सारे जीवन घालते पायघड्या वाटेतून


क्षण वेचावे छोटेसे मनाला हवेसे,
क्षणा-क्षणांत रमतेअसे जीवन हवे-हवेसे



-  स्वाती, August 02 2016

चाह

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याद है , रौशन-रौशन सी ऑखें
और जिंदादिल, बेफिक्र नज़र

आज़कल उस जगह
दिख़ती हैं सिमटीसी नज़र,
दिल और दिम़ाग के बीच
वैसीही, बिलकूल मध्यमसी;

उम्मीद है की उनमें
रौशनी और जिंदादिली
वापस दिलादूं;

यारा, बस इस बार,
मौका गवा न दे
यह है सिर्फ - अपने वास्ते  !


स्वाती, May 24, 00.23 am





Hidden

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Down and Deep
There is this thing, Which never left Where it was Pushed;
Companion of every moment Background voice for each act A feeling unsatiated Left to ruin in the dark;
Yet it lays  Underneath everything, Providing a strong base for the Veil within.

- Swati, April 07, 2016 22.28

Courage

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During the course of lifeWhen things aren't right, As the world turns up side down, and Yet, again indeed,
Even when you are left Without a rational posibility, of a desired outcome You just don't give up!
Not beacuse of speculation, Nor any Blind Hope, But the attitude that changes - Everything in  "Down to Earth" You,
Makes you determined, Come what may, To stand up, Work it out, and Make it all right !
- Swati, April 01, 2016

दहलीज़

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उम्मीद और नाउम्मीद की सीमापर जहां पर खड़े रहीसी है जिंदगी बस खडी है,
आगे या पिछे चलने के चाहकी आहट तक नहीं होती
भाव - विचारोंकी गलतफैहमी इस कदर की बस् ... चौक कर देखती रहती है जिंदगी खुदकी जिंदादिलीसे भी अलग ।
सिर्फ 'जैसे थे वैसे रहे' यहीं सोचमें डटकर खड़ी ना उम्मीद खोई है और न हीं हुआ है नाउम्मीद का काम तमाम  ।
इन लंबे पलोंकी सदिया अपनी निष्क्रीयता की सक्रीयता में व्यस्त, ताकी, सिर्फ काठ़पर रहा जाए इतमिनान से, न आर या पार।
- स्वाती  March 17, 2016, 00.35 AM

Hold on. ...

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When nothing left
Nothing what so ever,

It makes you gather pieces,
Your companion through hardships,

Which makes you sail the Ocean

Its not care nor is it love
It is just your ability,
To hold on !


So just hold on, to yourself !

when none else visible.


- Swati Feb 19, 2016


Another Firey Summer !

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And it came again
with its glorious light,
hot sweaty mornings
that are antidote for the
ill-satiated fire within;

Hot waves of breezy noons'
Warm eveninngs of magical skies,
Reminde the lonely Eagle's flight !

Why guard like a Hawk?
when sure of the sun-burns,
during lonely walks in
yet another firey summer !


- Swati Feb 17, 2016 23.32 hrs.