बह जा



कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक

अपनी गंभीरता की छाॅव में
कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़कर करनेकी,

वो, जो रहा है बाकी करनेसे
शांती है, की इस आंधी में 
जो बचा बस वहीं है, जिसे था बचाना
बाकी सबने, बस था बह जाना !

- Swati , Feb 14 2017 00. 55 am

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