Friday, May 12, 2017

पल




वैसे तो हर पल
जी ही लेते है !

कभी हसते,
कभी उलझते,
कभी सुलझाते,
कभी रो-रो कर तरसते,
सिर्फ जिये ही जाते;

उस पल को लेकीन 
हमने एक - दुसरे की 
ईट पर ईट ड़ालकर 
जो फासले तोड़े है,
की ईटोंके टुकड़ोंमेंसे
खिलती-हसती ज़िंदगी पायी।


- Swati May 12, 2017 11.09 am

No comments: