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Showing posts from May, 2017

Baggage

You took up on a journey, As this journey matters,  You took along,  all the things that matter,
They make your journey, 'Home, Away from Home' ;
You wanted them along, To cherish the journey, But instead, Things seem as if mood-spoiling,  They look nothing but your Baggage ;
Would you rid them off?
Oh dear, leave behind the baggage,  Go get your New Beginnings!
- Swati May 22, 2017 20.00

प्रश्नटाळू

काय उपयोग मोठ्या छातीचा ?  नुसतीच जर मिरवायचीत मापं तर? ;
तसा तर केलाच आहे सामना,  अनेकांनी - जिवंत, ज्वलंत प्रश्नांचा, थेट हृदय शस्त्रक्रीयेनंतर पण; 
आहे नं जर दमदार हृदय?  तर मग करत का नाही,  'एक तास प्रश्नोत्तरांचा?,
ज्यात नाहीयेत ठरवलेल्या निर्णयांच्या आघोषणा, वा  थेट प्रक्षेपीत भाषणबाजीची नाटकं !!

-स्वाती मे 18 2017 16.49

पल

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वैसे तो हर पल
जी ही लेते है !
कभी हसते, कभी उलझते, कभी सुलझाते, कभी रो-रो कर तरसते, सिर्फ जिये ही जाते;
उस पल को लेकीन  हमने एक - दुसरे की  ईट पर ईट ड़ालकर  जो फासले तोड़े है, की ईटोंके टुकड़ोंमेंसे खिलती-हसती ज़िंदगी पायी।

- Swati May 12, 2017 11.09 am

चांद

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पूनम की रात को  आयी एक सौगात ।

जिसकी सिर्फ आहट से  उम्मीदोंकी रोशनी  बस सी गई है  गरीबखानेकी ईट ईट पर ।
हाए ! 
इस चांद की अमावस कभी न हो ।।
- Swati May 11, 2017 9.00 pm