Wednesday, March 8, 2017

बदल दे

हो जा निड़र 
न रहे सिमट कर 

कर सीधे मुकाबला 
न रहे छिपछिपकर

कर जो है पसंद 
चुकाकर उसकी कीमत

न डर हर पल 
कर ले सामना जुटकर

सपनोंको बुन 
सपनोंको साकार कर
जी ले, जी भरकर 
छोड़ना मत हार मानकर

बन जा खुद बदलाव
बदलाव का रास्ता ताकना छ़ोडकर 

- स्वाती,  मार्च 08, 2017

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