Monday, February 6, 2017

सहभावना


कभी-कभी
हावी हो जाती है
छ़ा जाती है सोच-विचारोंपर;

बिलकूल जैसे स्किझोफ्रेनिया 
सारे अंतरंग को दुभंग करती;

अपने हर हिस्से को बनाती है
किसी औरही की असलीयत ।
या फिर ज़ोड़ देती है 
अपनी असलीयत से
किसी गैरकी होनी-अनहोनी ।

कैसे माने की 
गैर के खुशी या गम का एहसास
एकही ?;  सहभावना !

सुख़ से दर्द़ तक की ,
अज़ीब समानता, 
पूरी की पूरी इन्सानीयत 
एक सोच है सहभावना ।

- Swati February 06 2017 16.32 Mumbai 

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