Monday, February 20, 2017

Ghosts of an Era


For every Era,
There is a dawn 
And its Fall.

From the sudden dawn
Slowly, eventually,
Emerges the Fall.

An Era may perish,
Within the boom of its own.

In the ghostly silence
Lie the debries of 
Passions and Values, 
Definitive of times foregone!


- Swati, Feb. 20, 2017.

Tuesday, February 14, 2017

ब़ेशक़

कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक़
अपनी गंभीरता की छाॅव में ;

कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़नेकी,
की किया जाए वो,
रहा है जो बाकी करनेसे ;

शांती की इस आँधी में
बचा वहीं, जिसे था बचाना
संभलने को मजबूरी न बनाना
यहीं समझ़ लेना, ब़ेशक़ ।

- स्वाती February 14, 201720.45

बह जा

कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक

अपनी गंभीरता की छाॅव में
कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़कर करनेकी,

वो, जो रहा है बाकी करनेसे
शांती की इस आंधी में
जो बचा बस वहीं है जिसे था बचाना
बाकी सबने बस था बह जाना

- Swati , Feb 14 2017 00. 55 am

Monday, February 6, 2017

सहभावना


कभी-कभी
हावी हो जाती है
छ़ा जाती है सोच-विचारोंपर;

बिलकूल जैसे स्किझोफ्रेनिया 
सारे अंतरंग को दुभंग करती;

अपने हर हिस्से को बनाती है
किसी औरही की असलीयत ।
या फिर ज़ोड़ देती है 
अपनी असलीयत से
किसी गैरकी होनी-अनहोनी ।

कैसे माने की 
गैर के खुशी या गम का एहसास
एकही ?;  सहभावना !

सुख़ से दर्द़ तक की ,
अज़ीब समानता, 
पूरी की पूरी इन्सानीयत 
एक सोच है सहभावना ।

- Swati February 06 2017 16.32 Mumbai