आज़ाद !


कहते है की आज़ाद है
पंछी की तरह

आज़ादी के नाम पर
कहीं बंध ही नहीं रहे है

ज़ख़ड रहे है फैसलोंके दायरे
नक़ाब ओढे आज़ादी का

अब इतना समझ़ ही लिये
तो जान लो,

आज़ादी निभानेके लिये
अकेले दायरे संम्हलना नहीं काफी 

मगर जरूरी है
साथ जुड़कर जंजीरे पिघलाना ।


- स्वाती January 25 2017 18.24 India

Comments

Anonymous said…
Apt for the current situation in our society.
Thank you for sharing.
chanda asani said…
सदके जाऊँ।
आजादी की बात करते रहना बेहद जरूरी है वर्ना हम अपने आपके दायरों में ही जकड़ सकते हैं।
मिलकर जंजीर पिघलाने की खूब कही, सुभानल्लाह

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