Sunday, January 29, 2017

उगवती




क्षितीजाला फोडून आला 
सूर्य उघड्या जगती,
उगवतीचे रंग मिसळले
अंतरीच्या आकाशयात्री ;

काय जे होऊन गेले 
अन् काय पाठी राहिले ,
चिरनूतन जगण्याचे 
सोहोळे पुढे ठाकले !

दृश्य, स्पर्श अन् ऐकलेल्या 
वेदनांची याद आहे ,
क्षितीजाच्या उगवतीची 
आशाभरी साद आहे .

- Swati January 29, 2017 7.38 am @ Jaipur

Thursday, January 26, 2017

Melancholy


Watching You in your state,
of Resigned Connectedness
There was this joy, 
Of being able to watch You.

Yet then, 
Pensive Soberness refuses to leave the eyes!


- Swati, January 22, 2017

Wednesday, January 25, 2017

आज़ाद !


कहते है की आज़ाद है
पंछी की तरह

आज़ादी के नाम पर
कहीं बंध ही नहीं रहे है

ज़ख़ड रहे है फैसलोंके दायरे
नक़ाब ओढे आज़ादी का

अब इतना समझ़ ही लिये
तो जान लो,

आज़ादी निभानेके लिये
अकेले दायरे संम्हलना नहीं काफी 

मगर जरूरी है
साथ जुड़कर जंजीरे पिघलाना ।


- स्वाती January 25 2017 18.24 India

राह


अब भी बाकी है,
वह रास्ता पकड़ना;


उस आसमांमें, सुना है 
चांद और सूरज रहते है 
साथ-साथ, हमेशा ;

पूरी जिंदादिली को सिमटे,
ना कोई तड़प न कोई तलाश;

एक एहसास, जो रहता है 
खुशबूभरी राह में ।


- Swati January 25, 2017 6.54 am Mumbai

Friday, January 20, 2017

नकळत

चालताना भान असते
सोडलेल्या लाटांपाशी ;

थांबताना आवेग आवरे
हुकवलेल्या कड्यांपाशी ;

कधीतरी ओढ लागते 
सोनपिवळ्या चाहूलीची ;

हर नव्याचा आनंद आहे 
न कशाचे अप्रूपही ;

जवळ आहे जे दूर गेले 
अन् जवळ वाटे दूर जे अजूनही ;

थांबण्याची सक्ती नाही
अन् धावण्याची गरजही ;

काय अन् कसे हे करत जाते 
या वयाचे व्यक्तित्वही .

- स्वाती January 19, 2017 6.45 am

Sunday, January 8, 2017

Need

Feeling about something,
that without it, life shall no longer be;
but you were alive before,
and so are you upon loosing it !

Feeling acquisitive then !

Feeling about something,
your accompanist in everything;
taken for granted,
missed the most when lost even a while'

Felt what is a 'Need' Then ! 

- Swati Jan 08, 2017,