Friday, December 30, 2016

अकेलापन


कहते है की, खा जाता है अकेलापन !

फिर भी, मगर

कुछ ऐसा दे जाता है 
अपने भीतर
की हम बन गये है
हमसफऱ - अपने-आप के;

क्या खूब दोस्त अकेलापन !

बिछ़डते वक्त 
उसकी कमी ऐसे छ़ोड़ गया 
की उसके न होने का एहसास हीं न हो ।

बिछ़डने पर भी, 
इसकी बाँटीं हुई खैरात,
होती हैं मेरे पास, हर पल ।

मेरे अंदर की जिंदादिली को संवाँरता
यह प्यारासा दोस्त, जो,
फ़िर कभीं यहाँ, आने़ से रहा ।


- स्वाती 30.12.2016; 11.18 am

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