मह़कसी

कभी सोच कर भी 
न किया विश्वास 
की होंगे फिरसे जिंदादील

जहां पर न होगी परेशानी
किसीके नाराज़ होनेकी 
या खुद़ पर तरस आने की

अब यह जो एहसास 
छ़ाया है मुझ़ पर की 
जब तक रहेंगी साॅंसे 
बस रहूूंगी मजे़ में 
हर लम्हा, जी भरके 
सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते, 
जिंदगी के साथ, मह़कसी


- स्वाती   October 27, 2016, 16.45

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