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Showing posts from October, 2016

मह़कसी

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कभी सोच कर भी  न किया विश्वास  की होंगे फिरसे जिंदादील
जहां पर न होगी परेशानी किसीके नाराज़ होनेकी  या खुद़ पर तरस आने की
अब यह जो एहसास  छ़ाया है मुझ़ पर की  जब तक रहेंगी साॅंसे  बस रहूूंगी मजे़ में  हर लम्हा, जी भरके  सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते,  जिंदगी के साथ, मह़कसी

- स्वाती   October 27, 2016, 16.45

थमासा लम्हा

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आशा है, की बस थम जाये एक लम्हा, आनेवाले कल का ।
सुरज की धीमी रोशनी,
हलकीसी, खुशबूभरी हवा

साथ-साथ सांसोंमे सोयेसे,
लिपटी हुई निंदोमें जगेसे, अपने आप में दुनिया समेटेसे,