Thursday, October 27, 2016

मह़कसी

कभी सोच कर भी 
न किया विश्वास 
की होंगे फिरसे जिंदादील

जहां पर न होगी परेशानी
किसीके नाराज़ होनेकी 
या खुद़ पर तरस आने की

अब यह जो एहसास 
छ़ाया है मुझ़ पर की 
जब तक रहेंगी साॅंसे 
बस रहूूंगी मजे़ में 
हर लम्हा, जी भरके 
सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते, 
जिंदगी के साथ, मह़कसी


- स्वाती   October 27, 2016, 16.45

Sunday, October 9, 2016

थमासा लम्हा




आशा है, की बस थम जाये
एक लम्हा, आनेवाले कल का ।

 
सुरज की धीमी रोशनी,
हलकीसी, खुशबूभरी हवा


साथ-साथ सांसोंमे सोयेसे,
लिपटी हुई निंदोमें जगेसे,
अपने आप में दुनिया समेटेसे,


बस थमेसे उस पल, हर पल!



- स्वाती October 092016 11.00 am