चाह

सोचते है कुछ पाये ऐसा 
की मिलकर खुशी हो जाए
उसके पाने का इंतजार खत्म हो जाए

ताकी जान सके हम
की उसके पाने से पहलेकी तड़प
बेवजह तो न थी

क्या क्षणिक और खोख़ला था यह सुख?
या मिल रहा है सुकून, तह ए दिल तक?

अब तो नहीं पता क्या होगा अनुभव ?

अब तो है बस हम इस उम्मीद पर
की जिंदगी में कुछ पल, शायद
मिलेगा हमें भी वह सब
जिसे नहीं पाया अब तक


- स्वाती August 17, 2016 11.00 am

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