पल भर

कुछ पल कितने अजीब आए
'आज और अभी', के साथ-साथ
'सदियों पहले कभी', भी पास-पास लाए ।


कौनसी ताऱीख़, क्या समय, लगाए इसे ?
इसमें तो साथ-साथ तीन अनुभव समाए ।

एक था वर्तमान , जिसमें सिमटा था आपात,
उसी पल, दोनों कालोंके, दो लम्हों के साथ ;
वहां पर जम गयी थी मैं, कुल्फीस़ी,
एक अजीब वास्तव, सिर्फ पलभर !


- स्वाती  July 10, 22.43

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