Thursday, March 17, 2016

दहलीज़

उम्मीद और नाउम्मीद की सीमापर
जहां पर खड़े रहीसी है जिंदगी
बस खडी है,

आगे या पिछे चलने के चाहकी
आहट तक नहीं होती

भाव - विचारोंकी गलतफैहमी
इस कदर की बस् ...
चौक कर देखती रहती है जिंदगी
खुदकी जिंदादिलीसे भी अलग ।

सिर्फ 'जैसे थे वैसे रहे'
यहीं सोचमें डटकर खड़ी
ना उम्मीद खोई है
और न हीं हुआ है
नाउम्मीद का काम तमाम  ।

इन लंबे पलोंकी सदिया
अपनी निष्क्रीयता की
सक्रीयता में व्यस्त, ताकी,
सिर्फ काठ़पर रहा जाए
इतमिनान से, न आर या पार।

- स्वाती  March 17, 2016, 00.35 AM

Monday, March 7, 2016

Cacoon

A structure to nurture
Each other,


To shield from damage
A measure to heal the scars,


Cacoon is an unbroken layer
To be broken to free the new life.



- Swati, March 07, 2016 22.45