Friday, December 30, 2016

अकेलापन


कहते है की, खा जाता है अकेलापन !

फिर भी, मगर

कुछ ऐसा दे जाता है 
अपने भीतर
की हम बन गये है
हमसफऱ - अपने-आप के;

क्या खूब दोस्त अकेलापन !

बिछ़डते वक्त 
उसकी कमी ऐसे छ़ोड़ गया 
की उसके न होने का एहसास हीं न हो ।

बिछ़डने पर भी, 
इसकी बाँटीं हुई खैरात,
होती हैं मेरे पास, हर पल ।

मेरे अंदर की जिंदादिली को संवाँरता
यह प्यारासा दोस्त, जो,
फ़िर कभीं यहाँ, आने़ से रहा ।


- स्वाती 30.12.2016; 11.18 am

Friday, December 16, 2016

ऐतिहासीक भारत

मित्रों, !!!!

....  म्हणाले की, "इतिहास घडवणारे भारत",
कसला ढासू बाणेदार नायक
याच्या बुलंद छातीचा गवगवा त्याला मुबारक

करून टाकली रद्दी , अचानक, 
अगदी न भूतो न भविष्यती आत्मघातक
भलतेच ऐतिहासीक कपाळमोक्ष कारक

बेहिशेबी निर्णय झाला टंचाईकारक
लाखोंच्या सदर्यात भटकता प्रधानसेवक

म्हणतात आता की झाली एक 'चूक' !
सुलतानी लहरीने हरवली गरीबाची तहान - भूक

दोन हजारच्या टिकल्यांसाठी रांगारांगी,
देशभक्तीचा काय पण हुरूप !

अच्छे अच्छे, अक्कलेचे, 'दीन-दीन' कारभारी
अडाण्याच्या गाड्याचे भक्तगण लय भारी

बॅंका उलट्या अन् नोटा छोट्या 
रसातळाची जोखीम तरी चोराच्या उलट्या ...

अभाव रोखतेचा? , की अभाव अकलेचा?,
गप्पा विकासाच्या ? , की कारभार उलट्या काळजाचा? 

पण बघा , सांगितलेलं नं 
की घडवणारे इतिहास भारत ? 


- स्वाती December 16 2016

Friday, November 11, 2016

नोट !


सपनों के सौदागरोंने
क्या क्या बता बता कर
वोट ले लिये

ढाई सालों बाद भी
जब सपने तो पुरे होने से है
तो यह अब नोट वापस ले रहे है

- स्वाती 11 . 11. 2016 18.45 मुंबई


Thursday, October 27, 2016

मह़कसी

कभी सोच कर भी 
न किया विश्वास 
की होंगे फिरसे जिंदादील

जहां पर न होगी परेशानी
किसीके नाराज़ होनेकी 
या खुद़ पर तरस आने की

अब यह जो एहसास 
छ़ाया है मुझ़ पर की 
जब तक रहेंगी साॅंसे 
बस रहूूंगी मजे़ में 
हर लम्हा, जी भरके 
सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते, 
जिंदगी के साथ, मह़कसी


- स्वाती   October 27, 2016, 16.45

Sunday, October 9, 2016

थमासा लम्हा




आशा है, की बस थम जाये
एक लम्हा, आनेवाले कल का ।

 
सुरज की धीमी रोशनी,
हलकीसी, खुशबूभरी हवा


साथ-साथ सांसोंमे सोयेसे,
लिपटी हुई निंदोमें जगेसे,
अपने आप में दुनिया समेटेसे,


बस थमेसे उस पल, हर पल!



- स्वाती October 092016 11.00 am



Wednesday, September 28, 2016

हसीं

कभी कभी हसीं ऐसी की,
खुद़ की कमजोरी का एहसास छूपाने की चाह
कोई हसींके सिलवटोंसे दिखलाते जाए

ताकी कोई अपनी कमजोरी पर न खाए तरस

कभी कभी हसीं ऐसे की
चेहरे की नसोंकी हो रही हो कसरत

मायूसी भरे चेहरे पर चढ़ाया हो रंगीन चष्मा

जो सब कुछ औरही गहरा दिखाये जाए ।

और फिर कभी आती है एक
खिली हुई मुस्कुराहट

फैलीसी , चेहरेके ऊपर - भीतर,

जैसे की रौनक पर रंगोंकी बारिश हो जाए ।


- स्वाती September 27, 2016

Monday, September 19, 2016

कास

धुक्यात ओघळते
रंगांचे ठिपके
जग-रहाटीला झुलत
वार्याला डोलत
उभे आपसूक आपल्या जोमात;

कुठे आभाळी निळाई,
अन् सोवळ्यागत तेरडा,
चंदेरी कुमुदिनी कलाकुसर पाण्यात;

काठाशी कंदीली खरचुडी
कोंडी किटक परागीकरणात
रम्य,गूढात दाटले समृद्ध सजीव;

इथे गाळली सीतेनं आसवं भरमार
व्हावी फुलं ही जगभर,
पण,
मिळूदे विश्रांती,
परागांदा सीतेच्या लेकींच्या
आसवांना जन्मभर;

दवबिंदूंचा अलगद डोलारा कोमल
अल्लड इटूकला ठिपक्यांचा बहर
प्रकाशकणांना जलबिंदूची झालर;

सार्या आसमंतात स्वप्न इवले
उभे स्वच्छंद, शांत खंबीर
जरी दाटला आनंद महामूर.


Please note, आभाळी, तेरडा, कुमुदिनी, कंदील पुष्प (कंदील खरचुडी- परागीकरणासाठी किटकाला फुलात कोंडून ठेवणारं एक संदर दुर्मिळ फुलझाड), सीतेची आसवं, दवबिंदू ही खास कास पठारावर मिळणार्या फुलांची नावं आहेत. इथे तेरड्याची सोवळ्याच्या कदासारखा जांभळाभोर रंगाची फुलं दिसली.  

- स्वाती September 19, 2016 23.03 pm.
( Sept 16 - 18 2016)

Sunday, September 4, 2016

चुनाव

हाथ पर हाथ ङाले

यूॅहीं, बैठै बेठै 

हलकीसी नींद में भी
स्थिर रहना सीख़ लिया,

क्या करे?,

अपने कंधे पर,
अपने सिर को
ऊंचा रखने का
जब चुनहीं लिया ।


स्वाती, September 04, 2016.  20.13      Khandala Ghat

चुभ़न


कभ़ी न कभ़ी तो बह ही जाना
मकस़द यहीं मोतीयोंका


ताकी,

जान पर सवार चुभ़न से निपट़ कर
जिंदगी सवंर जाए


स्वाती , September 04, 2016, 19.27 Pune

सल

कधीतरी ओघळलंच पाहिजे,
घळघळून मोत्यांनी,

नाहीतरी सलच असतात
जीवाच्या गाभार्यात रूतलेली

बंद दाराबाहेर जायलाच लागतं, 
झळाळायला, मोत्यांना पण ! 

- स्वाती September 04, 2016 18.58 Pune.

Friday, September 2, 2016

हेडफोन्स


कानांमधे सुरांची दंगल
शहरी मुखवट्यांचं जंगल
कानांमनांत स्वरकल्लोळ

- स्वाती Sept. 02, 2016

Saturday, August 20, 2016

चाह

सोचते है कुछ पाये ऐसा 
की मिलकर खुशी हो जाए
उसके पाने का इंतजार खत्म हो जाए

ताकी जान सके हम
की उसके पाने से पहलेकी तड़प
बेवजह तो न थी

क्या क्षणिक और खोख़ला था यह सुख?
या मिल रहा है सुकून, तह ए दिल तक?

अब तो नहीं पता क्या होगा अनुभव ?

अब तो है बस हम इस उम्मीद पर
की जिंदगी में कुछ पल, शायद
मिलेगा हमें भी वह सब
जिसे नहीं पाया अब तक


- स्वाती August 17, 2016 11.00 am

Friday, August 19, 2016

बेवजह़

वैसे जरूरी तो नहीं है
कुछ भी, फिर भी;


कभी-कभी, कुछ-कुछ,
हो जाते है जरूरत ;

जैसे की सांसे लेना,
या हौसला रख़ना !



- Swati, August 17, 2016 11.30 am

Sunday, August 14, 2016

Borders

Borders are drawn,
Restriciting entry or exit
A thing that binds, together
That which may not bind

And it seperates the souls
Whose bond can't be unbound

Its a limit imposed,
A mechanism of control,  ?
Or a method of torture?

Minding by State?
Or State of Mind?

No matter what,
Borders are definitive.

Drawing a Border
Drawing a Line
Could it be animalistic?
Or mere game of survival?


- Swati , August 14, 2016 9.29 am

संभ्रम

पावसातला सह्याद्री आठवत
खुशालते चेरापूंजीतल्या धुक्यात
अन् खंडाळा घाटातल्या धुक्यात
सुखावते मेघालयाच्या आभासात

कुठं म्हणायचं, कशाला आपलं ?
कोण असतं, कशाला, कोणाचं ?

चार ठाव जगताना
सार्या आकाशाला कवळत
कशाला वागवायचं ओझं वेड्यागत ?

खूणावतं काही दूरून,
की आभासातच ते पण ?

जोडत जायचं काही-बाही
कशाला, उगाच विनाकारण ?

धुक्यातले गुपीत, 
क्षणोक्षण टिपत आठवणींचा खेळ, 
वा पांघरून कधी स्वप्नांची झालर
बसून गप्पगार, विचारात स्वगत
काही करून होईना, 
जे गेले व्हायचे राहून
काय गरज ज्याची, 
जर जगले त्यावाचून.


- स्वाती 14 ऑगस्ट 2016 8.41 am

Monday, August 8, 2016

The Descendants


Enjoying the bundle of goodies
Bestowed upon by the ancestors,

Coming to terms with bitterness thrown upon,
When you least expected while living,

It is is sharing every bit of it,
In thick and thin with those who matter,

Guarding the gifts for others
Relishing cosy midnight snack
With the ones who would carry your legacy.


- Swati, August 8, 2016 15.23
English, On Life As Such, Poems about Good Films

Wednesday, August 3, 2016

बरख़ा

इस बरस की बरसात
धो रही है बहुत कुछ
जो नह़ी निकल पाया
कोशिशों के बावजूद

नज़र मे धुंदलाते रंग
और हाथ न आती मकड़ी
सारे कुछ धूल रहे है
सर पर बरस रही है जो कबसे

बूंदोंके अनदेखे मोती
चले आ रहे है साथ
कुछ जालोंका सफ़ा कर
रोशन करने कुछ पल

कीचड़ को बहा के ले जाना
बरबाद रिश्तोंसे छुटवाना
एक सद़ी की बिदाई कर
अपने - आप जिंदादिली का एहसास !

इतना कुछ करती भी है यह बारिश ?
चलो अब तो उसीने बताया,
की है उसका वास्ता ज़िंदगी से
अब पहचाना, तो इसे मानो !


- स्वाती August 03, 2016.  17.21 pm

Tuesday, August 2, 2016

तीन जणींसाठी हायकू

1.
एक छोटूकली, नादात ठुमकत
येत होती शाळेतनं परत
पावसाच्या धारा, उन्हाचा पिसारा
इवल्याशा पावलांचा लोभस तोरा.

2.

कुठे शून्यात नजर, धुंद जोशात ही पोरं,
रिमझिम पावसात, वळवळता सिगारेटी धूर
गर्द गुलाबी लेऊन, उभे साक्षात जीवन
आब राखत चालली स्वप्ननगरीची लय

3.

आज फिरायला आली, बाई गुंडाळून कामं
झाडावरची पालवी बघे टक लावून
चाल खंबीर, डौलदार असे धुंद नादमग्न
सारे जीवन घालते पायघड्या वाटेतून


क्षण वेचावे छोटेसे मनाला हवेसे,

क्षणा-क्षणांत रमते असे जीवन हवे-हवेसे



-  स्वाती, August 02 2016

Monday, August 1, 2016

Moment

Baby girl Walk-dancing in rain.
While on the way to school,
Dancing in rhythm oblivious of the street,
She was amused for evry bit of her world

And then came the youth,
In her lively dark pink,
engrossed in smoking her cigarate,
She resembled the lively fashion parade.

Madam in a mood for a long walk after work
Enjoying the gentle breez of the rainy day
Warm sunlight afrer thundering showers
Her lively gaze to the city of her deeds
Personifies the life within, that very moment,


- Swati , August 01, 2016 12.45 pm



Saturday, July 30, 2016

सौगात

राह में चलते - चलते
थम से गये थे 
यह सोच कर ङरे से,
की अब तो इस सङक पर
कोई और नहीं बचा ।

सब पत्ते झड गये
और मौसम तो
सदाही रहेगा पतझङ का,
अबसे, यहांपर,
न होगी बारिश,
न आयेगी चैत की आहट;

केवल उछलेंगे यादोंके साये
इसी सिलसिलेमें लेकीन
उस अजीब पल पर
पाया की मेरे साथ है कोई,
सबसे सुंदर दोस्त
जो कभी छूटी ही नहीं मुझसे;

मेरी अपनी, मुझमें से ही पायी,
जिंदगी की शुरूवात से अंत तक की
सूरज किरणोंसी सौगात
जो बसी है मुझही में,
हमेशा साथ - साथ  ।

- स्वाती  July 30, 2016 9.45 am


Sunday, July 10, 2016

पल भर

कुछ पल कितने अजीब आए
'आज और अभी', के साथ-साथ
'सदियों पहले कभी', भी पास-पास लाए ।


कौनसी ताऱीख़, क्या समय, लगाए इसे ?
इसमें तो साथ-साथ तीन अनुभव समाए ।

एक था वर्तमान , जिसमें सिमटा था आपात,
उसी पल, दोनों कालोंके, दो लम्हों के साथ ;
वहां पर जम गयी थी मैं, कुल्फीस़ी,
एक अजीब वास्तव, सिर्फ पलभर !


- स्वाती  July 10, 22.43

Sunday, July 3, 2016

रहीसी ...

चले थे जो कुछ देर साथ;
अब तो, वे कहां? और हम यहां ।

होते है इर्द-गिर्द, अब जो भी,
पता नहीं उन्हें की हम कौन? और है कहां ?

हमारी नज़रसे, हममें है जिंदगी,
बसने से रहींसी, बस यहां ।

- स्वाती, July 3, 2016, 17.30

Sunday, June 12, 2016

What Happens?

Someone Stirring the stinking pond, while
Pretending 'Clean'n Clear', 

What Happens?   

Bothers!

Someone Opinionating the Whimsical,while
Making 'Peace', 

What Happens? 

Feels Cannibalizing!

Someone Cleverly tweaking, while
Deceiving, 

What Happens? 

Smells so Foul!

Someone Capturing the moment, while
First raindrop fell, 

What Happens?

Mesmerizes!

Someone Walking like a Cloud, while
In City, 

What Happens?
Feels Liberated!

Someone Spotting the 'Eyes'
From crowd, 

What Happens?

It, simply Matters!

- Swati, June 12, 21.47

Tuesday, June 7, 2016

Duality

There was a time,
When I killed 'Me',
which loved 'You';

And now there is 'Me',
who loves 'Me',
for having killed the old me,
for having bore the new me;

Without the new 'Me'
I was chaotically lonely.


-Swati, June 07, 2016, 11.13 am

Tuesday, May 24, 2016

चाह

याद है ,
रौशन-रौशन सी ऑखें
और जिंदादिल, बेफिक्र नज़र

आज़कल उस जगह
दिख़ती हैं सिमटीसी नज़र,
दिल और दिम़ाग के बीच
वैसीही, बिलकूल मध्यमसी;

उम्मीद है की उनमें
रौशनी और जिंदादिली
वापस दिलादूं;

यारा, बस इस बार,
मौका गवा न दे
यह है सिर्फ - अपने वास्ते  !


स्वाती, May 24, 00.23 am





Friday, April 29, 2016

उम्मीद

कहते है, 'वैसे तो हम सब अकेलेही होते है',
मगर अफसोस,
किसीका 'पूरा का पूरा अकेले होना',
उन्हे सिर्फ अकेलेपनके साथ निभाना पङता है ।

जो इतने खूशनसीब है कि
जिन्हे अकेलापन पाने के लिये
किसी -किसीसे कुछ देरका अवकाश लेना पङता है,
उम्मीद है वह पूरे के पूरे अकेले लोगोंकी
जिंदादिली की कामना करें ।

और याद रखीयेगा,
हर रोज इनकी खबर लेनेका,
और जब यह बुढ्ढे होकर गुजर जाये
तब जनाज़ा जरूर उठाइयेगा इनका

अगर इनमेंसे किसीने कभी किया हो ज़िक्र,
म्रृत्युपश्चात देहदान का
तो इनकी अंतिम इच्छा न टालना

इसके बावजूद के इन्सान मरने पर
उसके सङते हुए जिस्म के अलावा
उसके मन का कोई अस्तित्व नही बचता,
फिर भी इनका देहदान जरूर करवाना;

पूरे के पूरे अकेलेपन के दौरान क्या पता,
इन्होंने देहदान का यूं सोचा होगा
कि अपने मरने के बाद ही सही,
अलग-अलग इन्सानोंके साथ बटँकर ही सही,
अपने आँख, हृदय ,
या बाकी अवयवोंका अकेलापन
साथ-साथ में बदलही जाएगा  ।

- स्वाती,  April 29, 2016 22.34 Dombivali

Thursday, April 7, 2016

Hidden

Down and Deep
There is this thing,
Which never left
Where it was Pushed;

Companion of every moment
Background voice for each act
A feeling unsatiated
Left to ruin in the dark;

Yet it lays 
Underneath everything,
Providing a strong base
for the Veil within.


- Swati, April 07, 2016 22.28

Friday, April 1, 2016

Courage

During the course of life
When things aren't right,
As the world turns up side down,
and Yet, again indeed,

Even when you are left
Without a rational posibility,
of a desired outcome
You just don't give up!

Not beacuse of speculation,
Nor any Blind Hope,
But the attitude that changes -
Everything in 
"Down to Earth" You,

Makes you determined,
Come what may,
To stand up,
Work it out, and
Make it all right !

- Swati, April 01, 2016

Thursday, March 17, 2016

दहलीज़

उम्मीद और नाउम्मीद की सीमापर
जहां पर खड़े रहीसी है जिंदगी
बस खडी है,

आगे या पिछे चलने के चाहकी
आहट तक नहीं होती

भाव - विचारोंकी गलतफैहमी
इस कदर की बस् ...
चौक कर देखती रहती है जिंदगी
खुदकी जिंदादिलीसे भी अलग ।

सिर्फ 'जैसे थे वैसे रहे'
यहीं सोचमें डटकर खड़ी
ना उम्मीद खोई है
और न हीं हुआ है
नाउम्मीद का काम तमाम  ।

इन लंबे पलोंकी सदिया
अपनी निष्क्रीयता की
सक्रीयता में व्यस्त, ताकी,
सिर्फ काठ़पर रहा जाए
इतमिनान से, न आर या पार।

- स्वाती  March 17, 2016, 00.35 AM

Monday, March 7, 2016

Cacoon

A structure to nurture
Each other,


To shield from damage
A measure to heal the scars,


Cacoon is an unbroken layer
To be broken to free the new life.



- Swati, March 07, 2016 22.45

Friday, February 19, 2016

Hold on. ...



When nothing left
Nothing what so ever,

It makes you gather pieces,
Your companion through hardships,

Which makes you sail the Ocean

Its not care nor is it love
It is just your ability,
To hold on !


So just hold on, to yourself !

when none else visible.


- Swati Feb 19, 2016


Wednesday, February 17, 2016

Another Firey Summer !

And it came again
with its glorious light,
hot sweaty mornings
that are antidote for the
ill-satiated fire within;

Hot waves of breezy noons'
Warm eveninngs of magical skies,
Reminde the lonely Eagle's flight !

Why guard like a Hawk?
when sure of the sun-burns,
during lonely walks in
yet another firey summer !


- Swati Feb 17, 2016 23.32 hrs.

Wednesday, February 10, 2016

Hope

A feeling that desire would be fulfilled,
Not a rational expectation
Neither a blind belief;
Hope is a feeling in between!

An uncertain outcome,
Meets a strong desire
Possibility of fufillment;
Brings in all the sweetness,
Always ahead of the outcome!

Hope is a choice in between,
Of Desire and Resignment;
Feeling so unconditional, inexplicable
Just like Love!




- Swati February 10, 2016 03.34 am

Wednesday, January 27, 2016

Pathways

Walls of the fort
Build no relationship,
Nor are creative,

Gestures of psudo Safety,

Guarding possessions against intrusion
Walls are none but cowardice!

In finding keys to break walls,

In letting the walls break,
Lies true liberation;

Calling the Soul of Humanity -

In bringing pathways together.


- Swati January 27, 2016 15.25