Monday, September 29, 2014

ऐ जिंदगी !!

एक कहना है
तुझसे ऐ जिंदगी;


बस देती जा भरभरके
सारा कुछ अबसे,
जो नहीं मिला
अब तक तुझसे, 


तेरे रॅन्डम नियमों से ही
लगता है विश्वास से
की वह छुपे सारे अनुभव
जुड़ जाने चाहिए अब
मेरे रॅन्डम आशावादसे,

जरासी आहट से डरते हुए
अब मेरे अंदर जगी है चाह

किसी आहट ओर छांव के बरसनेकी,

ऐसी चाह जिसकी कोई नहीं सीमा
न हो जिसकी कोई सिसकीयां;


बस देती  जा भरपूर
वह सारे ख्वाब, जिन्हे देखना भी 

बन गया था बंदी 
नींद के कैदखानेका . 

- स्वाती    September 28, 2014 

Thursday, September 11, 2014

9 / 11 का कत्ल

9 /11, सितंबर ग्यारह,
इतिहास के पन्नोंकी एक तारीख
जिस दिन गिराये थे दो तामीर
और कत्ल हुआ था कईं लोगोंकी रोटीयोंका.


यहीं तारीख मुक्र हुई थी
पिछले साल,
की जो रिश्ता बुन रहीं थी मैं कईं साल,
उसका कत्ल होना था इसी दिन, बाकायदा.


आज ठीक 365 दिन
और उतनीही रातोंके बाद
लग रहा है
शायद उस रिश्तेका कत्ल खत्म हुआ है
और 
शोक मनाना भी


इस तारीख पर निशान है कईं,
कुछ खूनोंके और कईं मरे सपनोंके
इतिहास के इन लम्होंको
अलविदा और सलाम.


- स्वाती Sept. 11, 2014 19.00