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Showing posts from January, 2013

याद

तुम्हारी  याद  मैं  वह प्यारे से रस्ते  घूमकर आती हूँ  
या पता नहीं  कीन लाशोंकी इमारते  नजरकैद कर आती हूँ ?
- स्वाती,  January 29, 2013

मर्जी सर - आँखों पर

सदीयों पहले  खिल उठी थी जिन्दगी  हमारी हसीं के बल पर 
दुनिया के इस पार  पैरों तले विरानी का खँडहर 
हमारे झगड़ने की आदत  और वह निभाने की ताक़द
चलो ले लेते है 
आपकी मर्जी, सर - आँखों पर
- स्वाती, January 29, 2013