Wednesday, January 30, 2013

याद

तुम्हारी  याद  मैं 
वह प्यारे से रस्ते 
घूमकर आती हूँ  

या पता नहीं 
कीन लाशोंकी इमारते 
नजरकैद कर आती हूँ ?

- स्वाती,  January 29, 2013 

मर्जी सर - आँखों पर

सदीयों पहले 
खिल उठी थी जिन्दगी 
हमारी हसीं के बल पर 

दुनिया के इस पार 
पैरों तले विरानी का खँडहर 

हमारे झगड़ने की आदत 
और वह निभाने की ताक़द

चलो ले लेते है 
आपकी मर्जी, सर - आँखों पर

- स्वाती, January 29, 2013