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अतीत का रिश्ता

एक बिखरा रिश्ता
छोड़ आए थे उस पल
जो कभी नहीं भूला

वहाँ पर छोड़ा था
एक घर
जिसे समझते थे मकान

छोड़ा था, 
ऐसे मकान की खोज में
जिसे घर कह सके
धूप से बचाने वाला,
खुशीयाँ बरसाने वाला,
और रात में सपने देने वाला;

ऐसा घर जिससे बना सके
ऐसा रिश्ता - जो बिखराया था,
जिसे भूल नहीं पाए

उस घर को न बना पाए
 बना भी पाए तो क्या ?

                 - स्वाती Sept. 22, 2012

माया

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सर्द पावसाळी हवेला
गार वाऱ्याचे उमाळे

ओल्या धुक्याची झालर
कडेलोटात ओघळे

गच्च रानात गुपित
रुण - झूण उलगडे
संगे सोबती शेवाळी
शांत पहाडाचे कडे
चिंब ओथंबले प्राण
श्वास - श्वास उलगडे

मेघ मल्हाराची माया
आले संगीत चहूकडे.

- स्वाती 3 Sept, 2012. #MarathiKavita