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Showing posts from May, 2012

नज़र

नज़र
नज़र दबी दबी
इक नकाब सी |
आँखोंके अंगार
जैसे छुपाये जाये ||

नज़र नमी नमी
एक चिराग सी |
प्यार के दर्द
जैसे दिखाए जाये ||

नज़र सूखी सूखी
इक खँडहर सी |
गम के दर्द
जैसे न सह पाये ||

नज़र खिली खिली
इक गुलदस्ते सी |
पंछीयोंके गाने
जैसे शरमाँती जाये ||

नज़र शांत, बेखयाली
इक प्यारे ख्वाब सी |
समुन्दर की गहराई
जैसे लांघे जाये ||

- स्वाती में ३, २०१२.