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Wild Flower in Meghalaya

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Shillong & Cherapunji, Meghalaya, India, Nov 9 - 10, 2012

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Cherry Blossom On the way to Shillong Point








Cherry Blossom - Close up


Flowers in Meghalaya 1
Flowers in Meghalaya 2 "Strong Rose"  Flowers in Meghalaya 3
Flowers in Meghalaya 4 Flowers in Meghalaya 5














अतीत का रिश्ता

एक बिखरा रिश्ता
छोड़ आए थे उस पल
जो कभी नहीं भूला

वहाँ पर छोड़ा था
एक घर
जिसे समझते थे मकान

छोड़ा था, 
ऐसे मकान की खोज में
जिसे घर कह सके
धूप से बचाने वाला,
खुशीयाँ बरसाने वाला,
और रात में सपने देने वाला;

ऐसा घर जिससे बना सके
ऐसा रिश्ता - जो बिखराया था,
जिसे भूल नहीं पाए

उस घर को न बना पाए
 बना भी पाए तो क्या ?

                 - स्वाती Sept. 22, 2012

माया

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सर्द पावसाळी हवेला
गार वाऱ्याचे उमाळे

ओल्या धुक्याची झालर
कडेलोटात ओघळे

गच्च रानात गुपित
रुण - झूण उलगडे
संगे सोबती शेवाळी
शांत पहाडाचे कडे
चिंब ओथंबले प्राण
श्वास - श्वास उलगडे

मेघ मल्हाराची माया
आले संगीत चहूकडे.

- स्वाती 3 Sept, 2012. #MarathiKavita

Three Ducks @ Bangana Pond, Walkeshwar, Mumbai

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Three Ducks @ Bangana Pond, Walkeshwar, Mumbai.

Duck 2 @ Bangana Pond, Walkeshwar, Mumbai

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Duck 2 @ Bangana Pond, Walkeshwar, Mumbai.

White Duck @ Banganga Pond, Walkeshwar, Mumbai

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White Duck @ Banganga Pond, Walkeshwar, Mumbai.

Swan @ Banganga Pond, Waalkeshwar, Mumbai.

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Just Photos This Time. Aurangabad.

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This was my third visit to Aurangabad in June 2011. I am ready to go there ... well, whenever I can spare myself from work, home and my nonsence! 
The three places from these photographs, The Ellora's Kailas Temple, Ajantha Caves and the Daulatabad Fort - do represent 3 different religions in India. To me religion maters little. These places attract me for a very simple reason - they are human made beauties. They represent a sense of fathomless creativity, determination and collective action of the human mind. I love and respect that and care for just that and only that.


Me an Atheist, gets a very different feeling while being in Kailas Temple. I learnt about a beautiful synchronization between human efforts, intellect and our fear for the unknown and hence the emotion of faith, a complete surrender to a belief, without any questions or doubts. Some how, this cave, the kailas temple makes me understand others being theist and not crib about it.











The Fort at Daulatabad has a beautiful …

Girly Moms and Man Boys

I Love being served
and being reserved. I look for a zone 'm privy with
Adore the moment you and me be with.
But for the sentimental centers
and cobwebs in the corners
I hate to part with.
I long to pretend reading a book
Only to have a look
At you standing with a tranquil look.
I long to wait in front of the window of your nook And to have a look At you reading a book. At the center of my tea pot
Lies the sunshine of your thought.
Behind every smoky circles caught
Lies the moonlight of your thought.
You are there my boy to be my man. You are there my girl to be my mom.

Oh! I got me caught.
- Swati July 17, 2012.

नज़र

नज़र
नज़र दबी दबी
इक नकाब सी |
आँखोंके अंगार
जैसे छुपाये जाये ||

नज़र नमी नमी
एक चिराग सी |
प्यार के दर्द
जैसे दिखाए जाये ||

नज़र सूखी सूखी
इक खँडहर सी |
गम के दर्द
जैसे न सह पाये ||

नज़र खिली खिली
इक गुलदस्ते सी |
पंछीयोंके गाने
जैसे शरमाँती जाये ||

नज़र शांत, बेखयाली
इक प्यारे ख्वाब सी |
समुन्दर की गहराई
जैसे लांघे जाये ||

- स्वाती में ३, २०१२.

छोड़

छोड़  खुद को छोड़ दे खुद के हाल पर |
बेहोश हो जाए वह जो घसीट लाए
तुम्हे इस मकाम पर ||

चंद मासूम सपनोंकी आस पर |
क्यों मरे कोई हर पल,
एक ज़िंदा लाश बनकर ? ||

बेवजह ढुंडते है जमीर सड़क पर |
गाड आये थे जिसे हम
दिल औ दिमाग की दहलीज पर ||

उन लम्हों का साया सा मन पर |
बाँध रहा है हर पल
दिल के उम्मीद को कस कर ||

छोड़ दे खुद को खुद के हाल पर |
बन जा इक लहर
जो न मिटेगी नैय्या पार होने पर ||

- स्वाती अप्रैल २२, २०१२

आज्जी

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सुकलेली बकुळ फुले
पुस्तकातून घरंगळली
जसा सुरकुतला तुझा हात
ज्याने जेवणे रांधली

जेंव्हा आला होता ताप
हवा होता फक्त मऊ-भात
डोक्यावर थोपटत
तुझे मऊशार हात

ताक घुसळते तुझे हात
लोणी काढताना अलगद
गाणे गोड गळ्यात

खेळून प्रपंचाचा खेळ
जरी विरक्ती मनात
काम करण्याची खूब
सार्या नसानसांत

आले कमरे लगत
माझे मऊशार केस
नवी वेणी हवी रोज
काही तरी खास - खास

बंद सारी दारे करून
तू तोर्यात रखवालदार
"हं, होऊ दे हिची वेणी,
नको बघायला कोणी
अस्से गळ्यातले केस."

मी मग एक दिवस
केला गुपचूप बॉब-कट
अर्धी - उघडी मान,
आले नादात मिरवत

माया भरला तळफळाट
तुझे डोळे भरून
माझी पाठ - तुझे हात
आले सुजून, सुजून

तू गेल्या पासून गं 
रोज पडते घराबाहेर
कडी - कुलूपा सोबत,
होते तुझ्या राज्यात
घर उघडे सतत


बंद घरामध्ये आता
श्वास कोंडतही नाही
तशी श्वास घेण्याची
उसंतही असत नाही.

- स्वाती March 5, 2012