Tuesday, August 15, 2017

स्वातंत्र्याची सत्तरी

सत्तरीच्या म्हातार्यांंना
नसते घरघर आजकाल,
पण लागलाय चळ
उगाळण्याचा जुनाट काळ;

काढत वाभाडे जळकट
कोणी सुटले मोकाट,
त्यांची सोईस्कर लेखणी
सोशल मीडिया चिल्लर-अरभाट;

वीट वीट उचकटवत 
देशात आणलाय वीट,
कसे जगावे आज जगात
पांघरून भेदाभेदाची चिरगुटं?;

देश सत्तरीचा झाला 
अवकळा आल्यागत,
आता गाठायची लढाई
देशत्वाच्या अस्तित्वाची फक्त;

शांत डोक्याने विचार
सावध पावलांचा खंबीर आचार,
टिकवूया सत्तरीची वाटचाल
बहुविविधतेला सामिलकीची झालर;

आता नाही भरली आमची शंभरी
करू बेचिराख त्यांना,
ज्यांनी मतांच्या जोरावर
आमच्या नोटांची मेख मारली.

- Swati August 15, 2017 00.00

Saturday, July 29, 2017

बाळांनो


काल परवाची गोष्ट आहे 
भेटलो होतो प्रथमच;
जिकडे बनलो 'मी' आपण;

पाण्यात खेळता, खेळता 
शिकलो आपण - हाताने पकडणं, 
अलगद पाणी भरता, भरता
भरभरून खेळलो आपण;

माहितीच नव्हते शब्दच मुळी,
ना 'मित्र' ना 'मैत्री';
पण एकदम पहिले, एकमेकांचे 
सवंगडी बनलो आपण;

लहानपणाचं अक्खं तप
साथ - साथ घडलो आपण;

रोज रोजची जुनीच तरी
नवीच वाटली 
मस्ती - मारामारी, 
चिडवा - चिडवी आणि 
चिडण्या - रडवण्याची खुमारी
अशा मैत्रीच्या नात्यात गुंफलो आपण;

अगदी आत्ताची गोष्ट आहे 
की 'निरोप समारंभ' होताना 
आपापल्या स्वप्नांसाठी 
विखूरलो होतो आपण;

आज परत भेटताना 
आपल्यातलं द्वाड मूल होऊन
पुन्हा एकदा किलबिलाट करतो आपण;

आपापल्या 'मी' मधे दडलेले,
'आम्ही सारे' पुन्हा गवसतानां
'पुन्हा भेटूया' असं म्हणत 
गहिवरतो आपण

- स्वाती
ही कविता July 11, 2017 लागला केली व "बालमौहन ८७" घ्या Reunion घ्या वेळेस July 29, 2017 सुर्यवंशी सभागृह येथे प्रथम सादर केली.

Monday, May 22, 2017

Baggage

You took up on a journey,
As this journey matters, 
You took along, 
all the things that matter,
They make your journey,
'Home, Away from Home' ;

You wanted them along,
To cherish the journey,
But instead,
Things seem as if mood-spoiling, 
They look nothing but your Baggage ;

Would you rid them off?

Oh dear, leave behind the baggage, 
Go get your New Beginnings!

- Swati May 22, 2017 20.00

Friday, May 19, 2017

प्रश्नटाळू


काय उपयोग मोठ्या छातीचा ? 
नुसतीच जर मिरवायचीत मापं तर? ;

तसा तर केलाच आहे सामना, 
अनेकांनी - जिवंत, ज्वलंत प्रश्नांचा,
थेट हृदय शस्त्रक्रीयेनंतर पण; 

आहे नं जर दमदार हृदय? 
तर मग करत का नाही, 
'एक तास प्रश्नोत्तरांचा?,

ज्यात नाहीयेत ठरवलेल्या निर्णयांच्या आघोषणा, वा 
थेट प्रक्षेपीत भाषणबाजीची नाटकं !!


-स्वाती मे 18 2017 16.49

Friday, May 12, 2017

पल




वैसे तो हर पल
जी ही लेते है !

कभी हसते,
कभी उलझते,
कभी सुलझाते,
कभी रो-रो कर तरसते,
सिर्फ जिये ही जाते;

उस पल को लेकीन 
हमने एक - दुसरे की 
ईट पर ईट ड़ालकर 
जो फासले तोड़े है,
की ईटोंके टुकड़ोंमेंसे
खिलती-हसती ज़िंदगी पायी।


- Swati May 12, 2017 11.09 am

Thursday, May 11, 2017

चांद

पूनम की रात को 
आयी एक सौगात ।

जिसकी सिर्फ आहट से 
उम्मीदोंकी रोशनी 
बस सी गई है 
गरीबखानेकी ईट ईट पर ।

हाए ! 

इस चांद की अमावस कभी न हो ।।

- Swati May 11, 2017 9.00 pm

Sunday, March 19, 2017

संथ -स्वैर

असतंच की, चलन - वलन
कुणालाच पत्ता न लागेलसं ;

कदाचित न कळेलसं स्वतःलाही
तरीही गतिमान, सउद्देश चालणं ;

विनापर्वा, विनासोबत
आपल्याच तालात - डौलात !

- Swati, March 19, 2017 22.00

Monday, March 13, 2017

Give it a Break !

A very own self of mid 40's,
You are yet to hit the 50!

Suavely navigating down the memory lane,
Or climbing up the dream street,
You have turned things upside down,
Braved a fall on stormy rides.

But now you look for a smooth flow,
Of life and cash and peaceful bliss,
And you are ready to leave the annoying ones,
Or those irritating stupidities you tolerated.

Your sense of duty getting 'Inwards',
You crave for things to make peace for your own,
Your fathomless will and self actualisation,
Has known no greater heights ever before.

So just do it, for your own sake,
Give it a break!




- Swati, March 12, 2017 20.59

Wednesday, March 8, 2017

बदल दे

हो जा निड़र 
न रहे सिमट कर 

कर सीधे मुकाबला 
न रहे छिपछिपकर

कर जो है पसंद 
चुकाकर उसकी कीमत

न डर हर पल 
कर ले सामना जुटकर

सपनोंको बुन 
सपनोंको साकार कर
जी ले, जी भरकर 
छोड़ना मत हार मानकर

बन जा खुद बदलाव
बदलाव का रास्ता ताकना छ़ोडकर 

- स्वाती,  मार्च 08, 2017

Be Bold for Change !

Be Fearless,
Not Docile,

Be Direct,
Not Deceptive,

Make a Choice, 
Own it up, 

Be not Scared, 
Face it up,

Make a Dream, 
Make it come true,
Live it up,
Do not Give Up!

Be the Change,
Not Wait for Change,

Be Yourself,
Be Bold, for Change!

- Swati March 8, 2017.

Wednesday, March 1, 2017

Feelings


We are the sum total, 
Of little things we did,
With our dear ones gone!

A simple fruit shared with a darling grandmother;

A meal cooked for me by grandfather;

An evening treat of junk food by the great uncle;

And the smile of a dying dear one as he sipped the Tea I made for him, 

These are the few things which keep,
Intense Feelings alive,
As an assuarance of Being Human!

- Swati March 01, 2017

Monday, February 20, 2017

Ghosts of an Era


For every Era,
There is a dawn 
And its Fall.

From the sudden dawn
Slowly, eventually,
Emerges the Fall.

An Era may perish,
Within the boom of its own.

In the ghostly silence
Lie the debries of 
Passions and Values, 
Definitive of times foregone!


- Swati, Feb. 20, 2017.

Tuesday, February 14, 2017

ब़ेशक़

कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक़
अपनी गंभीरता की छाॅव में ;

कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़नेकी,
की किया जाए वो,
रहा है जो बाकी करनेसे ;

शांती की इस आँधी में
बचा वहीं, जिसे था बचाना
संभलने को मजबूरी न बनाना
यहीं समझ़ लेना, ब़ेशक़ ।

- स्वाती February 14, 201720.45

बह जा

कुछ लम्होंके साये में
आता है एक जुनून सा
जो मिट़ाता है सारे शक

अपनी गंभीरता की छाॅव में
कुछ़ शांत पलोंमें
मिल जाती है शक्ती
पूरे होशोंसे जुट़कर करनेकी,

वो, जो रहा है बाकी करनेसे
शांती की इस आंधी में
जो बचा बस वहीं है जिसे था बचाना
बाकी सबने बस था बह जाना

- Swati , Feb 14 2017 00. 55 am

Monday, February 6, 2017

सहभावना


कभी-कभी
हावी हो जाती है
छ़ा जाती है सोच-विचारोंपर;

बिलकूल जैसे स्किझोफ्रेनिया 
सारे अंतरंग को दुभंग करती;

अपने हर हिस्से को बनाती है
किसी औरही की असलीयत ।
या फिर ज़ोड़ देती है 
अपनी असलीयत से
किसी गैरकी होनी-अनहोनी ।

कैसे माने की 
गैर के खुशी या गम का एहसास
एकही ?;  सहभावना !

सुख़ से दर्द़ तक की ,
अज़ीब समानता, 
पूरी की पूरी इन्सानीयत 
एक सोच है सहभावना ।

- Swati February 06 2017 16.32 Mumbai 

Sunday, January 29, 2017

उगवती




क्षितीजाला फोडून आला 
सूर्य उघड्या जगती,
उगवतीचे रंग मिसळले
अंतरीच्या आकाशयात्री ;

काय जे होऊन गेले 
अन् काय पाठी राहिले ,
चिरनूतन जगण्याचे 
सोहोळे पुढे ठाकले !

दृश्य, स्पर्श अन् ऐकलेल्या 
वेदनांची याद आहे ,
क्षितीजाच्या उगवतीची 
आशाभरी साद आहे .

- Swati January 29, 2017 7.38 am @ Jaipur

Thursday, January 26, 2017

Melancholy


Watching You in your state,
of Resigned Connectedness
There was this joy, 
Of being able to watch You.

Yet then, 
Pensive Soberness refuses to leave the eyes!


- Swati, January 22, 2017

Wednesday, January 25, 2017

आज़ाद !


कहते है की आज़ाद है
पंछी की तरह

आज़ादी के नाम पर
कहीं बंध ही नहीं रहे है

ज़ख़ड रहे है फैसलोंके दायरे
नक़ाब ओढे आज़ादी का

अब इतना समझ़ ही लिये
तो जान लो,

आज़ादी निभानेके लिये
अकेले दायरे संम्हलना नहीं काफी 

मगर जरूरी है
साथ जुड़कर जंजीरे पिघलाना ।


- स्वाती January 25 2017 18.24 India

राह


अब भी बाकी है,
वह रास्ता पकड़ना;


उस आसमांमें, सुना है 
चांद और सूरज रहते है 
साथ-साथ, हमेशा ;

पूरी जिंदादिली को सिमटे,
ना कोई तड़प न कोई तलाश;

एक एहसास, जो रहता है 
खुशबूभरी राह में ।


- Swati January 25, 2017 6.54 am Mumbai

Friday, January 20, 2017

नकळत

चालताना भान असते
सोडलेल्या लाटांपाशी ;

थांबताना आवेग आवरे
हुकवलेल्या कड्यांपाशी ;

कधीतरी ओढ लागते 
सोनपिवळ्या चाहूलीची ;

हर नव्याचा आनंद आहे 
न कशाचे अप्रूपही ;

जवळ आहे जे दूर गेले 
अन् जवळ वाटे दूर जे अजूनही ;

थांबण्याची सक्ती नाही
अन् धावण्याची गरजही ;

काय अन् कसे हे करत जाते 
या वयाचे व्यक्तित्वही .

- स्वाती January 19, 2017 6.45 am

Sunday, January 8, 2017

Need

Feeling about something,
that without it, life shall no longer be;
but you were alive before,
and so are you upon loosing it !

Feeling acquisitive then !

Feeling about something,
your accompanist in everything;
taken for granted,
missed the most when lost even a while'

Felt what is a 'Need' Then ! 

- Swati Jan 08, 2017, 




Friday, December 30, 2016

अकेलापन


कहते है की, खा जाता है अकेलापन !

फिर भी, मगर

कुछ ऐसा दे जाता है 
अपने भीतर
की हम बन गये है
हमसफऱ - अपने-आप के;

क्या खूब दोस्त अकेलापन !

बिछ़डते वक्त 
उसकी कमी ऐसे छ़ोड़ गया 
की उसके न होने का एहसास हीं न हो ।

बिछ़डने पर भी, 
इसकी बाँटीं हुई खैरात,
होती हैं मेरे पास, हर पल ।

मेरे अंदर की जिंदादिली को संवाँरता
यह प्यारासा दोस्त, जो,
फ़िर कभीं यहाँ, आने़ से रहा ।


- स्वाती 30.12.2016; 11.18 am

Friday, December 16, 2016

ऐतिहासीक भारत

मित्रों, !!!!

....  म्हणाले की, "इतिहास घडवणारे भारत",
कसला ढासू बाणेदार नायक
याच्या बुलंद छातीचा गवगवा त्याला मुबारक

करून टाकली रद्दी , अचानक, 
अगदी न भूतो न भविष्यती आत्मघातक
भलतेच ऐतिहासीक कपाळमोक्ष कारक

बेहिशेबी निर्णय झाला टंचाईकारक
लाखोंच्या सदर्यात भटकता प्रधानसेवक

म्हणतात आता की झाली एक 'चूक' !
सुलतानी लहरीने हरवली गरीबाची तहान - भूक

दोन हजारच्या टिकल्यांसाठी रांगारांगी,
देशभक्तीचा काय पण हुरूप !

अच्छे अच्छे, अक्कलेचे, 'दीन-दीन' कारभारी
अडाण्याच्या गाड्याचे भक्तगण लय भारी

बॅंका उलट्या अन् नोटा छोट्या 
रसातळाची जोखीम तरी चोराच्या उलट्या ...

अभाव रोखतेचा? , की अभाव अकलेचा?,
गप्पा विकासाच्या ? , की कारभार उलट्या काळजाचा? 

पण बघा , सांगितलेलं नं 
की घडवणारे इतिहास भारत ? 


- स्वाती December 16 2016

Friday, November 11, 2016

नोट !


सपनों के सौदागरोंने
क्या क्या बता बता कर
वोट ले लिये

ढाई सालों बाद भी
जब सपने तो पुरे होने से है
तो यह अब नोट वापस ले रहे है

- स्वाती 11 . 11. 2016 18.45 मुंबई


Thursday, October 27, 2016

मह़कसी

कभी सोच कर भी 
न किया विश्वास 
की होंगे फिरसे जिंदादील

जहां पर न होगी परेशानी
किसीके नाराज़ होनेकी 
या खुद़ पर तरस आने की

अब यह जो एहसास 
छ़ाया है मुझ़ पर की 
जब तक रहेंगी साॅंसे 
बस रहूूंगी मजे़ में 
हर लम्हा, जी भरके 
सिर्फ उस पलके साथ 

आते हुए सच को बाहोंमें लेते, 
जिंदगी के साथ, मह़कसी


- स्वाती   October 27, 2016, 16.45